श्री नृसिंह आरती
भगवान नृसिंहदेव से सुरक्षा और भक्ति में विघ्नों के नाश की प्रार्थना।
कृष्णकृपामूर्ति श्री श्रीमद ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के प्रति कृतज्ञता के साथ।
संस्कृत श्लोक
श्लोक 1
नमस् ते नरसिंहाय / प्रह्लादाह्लाद-दायिने । हिरण्यकशिपोर् वक्षः / शिला-टङ्क-नखालये ॥
अर्थ: मैं भगवान नृसिंहदेव को नमस्कार करता हूँ, जो भक्त प्रह्लाद को आनंद देने वाले हैं और जिनके नाखून पत्थर के समान कठोर हिरण्यकशिपु की छाती को चीरने वाले छेनी के समान हैं।
श्लोक 2
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो / यतो यतो यामि ततो नृसिंहः । बहिर् नृसिंहो हृदये नृसिंहो / नृसिंहम् आदिं शरणं प्रपद्ये ॥
अर्थ: भगवान नृसिंहदेव यहाँ हैं, और वे वहाँ भी हैं। मैं जहाँ कहीं भी जाता हूँ, वहाँ भगवान नृसिंहदेव उपस्थित हैं। वे हृदय के भीतर हैं और बाहर भी। मैं उन आदि भगवान नृसिंहदेव की शरण ग्रहण करता हूँ।
श्लोक 3
तव कर-कमल-वरे नखम् अद्भुत-शृङ्गं / दलित-हिरण्यकशिपु-तनु-भृङ्गम् । केशव धृत-नरहरि-रूप जय जगदीश हरे ॥
अर्थ: हे केशव! हे नरहरि रूप धारण करने वाले जगदीश्वर! आपकी जय हो। जिस प्रकार व्यक्ति अपनी उँगलियों से एक भौंरे को आसानी से कुचल देता है, उसी प्रकार आपने अपने कर-कमलों के अद्भुत एवं तीक्ष्ण नाखूनों से हिरण्यकशिपु के शरीर को चीर डाला है।



