Radha Krishna deities adorned with flower garlands on temple altar with pink backdrop
    Krishna sacred lotus feet divine symbols spiritual worship

    जन्माष्टमी रेसिपी और छप्पन भोग

    मध्यरात्रि बाल कृष्ण को अर्पित मधुर प्रसाद — मुख्य रेसिपी तथा सम्पूर्ण 56 पदार्थों का छप्पन भोग।

    सर्वप्रिय जन्माष्टमी रेसिपी हैं माखन मिश्री, पंजीरी, पंचामृत और खीर — सभी मध्यरात्रि पूजा में बाल कृष्ण को अर्पित। विशेष अवसरों पर भक्त छप्पन भोग बनाते हैं: 56 पदार्थों का भव्य भोग जो मिष्ठान्न, नमकीन, अन्न, दुग्ध, पेय और फलों को समेटता है, भगवान के प्रति पूर्ण प्रेम व्यक्त करते हुए। समस्त भोग बिना प्याज-लहसुन के सात्त्विक रूप से बनाकर अर्पित किया जाता है, फिर प्रसाद रूप में ग्रहण होता है।

    मुख्य जन्माष्टमी प्रसाद रेसिपी

    ये चार पदार्थ प्रत्येक जन्माष्टमी भोग के हृदय में हैं। सभी व्रत हेतु अन्न-रहित-अनुकूल और बिना प्याज-लहसुन के बने हैं।

    माखन मिश्री

    कृष्ण का सर्वप्रिय आहार। ताजा श्वेत माखन (उत्तम हो घर पर मलाई से निकाला) को मुलायम और फूला होने तक फेंटें, फिर धीरे से पिसी मिश्री और कुछ तुलसी पत्र मिलाएँ। मध्यरात्रि बाल कृष्ण को एक छोटी कटोरी अर्पित करें — सरल, शुद्ध और भगवान को प्रिय।

    पंजीरी

    गेहूँ का आटा (या व्रत हेतु सिंघाड़े/कुट्टू का आटा) घी में मंद आँच पर सुनहरा और सुगंधित होने तक भूनें। पिसी शक्कर, कटे बादाम, काजू, मखाना, खरबूजे के बीज और चुटकी इलायची मिलाएँ। भलीभाँति मिलाकर गुनगुना अर्पित करें — उत्तर भारत का पारम्परिक जन्माष्टमी प्रसाद।

    पंचामृत

    अभिषेक में प्रयुक्त पाँच पदार्थों का अमृत। ताजा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर समान प्रेममय मात्रा में मिलाएँ, उपलब्ध हो तो थोड़ा गंगाजल, तुलसी पत्र और कुछ फल या मेवे डालें। विग्रह के स्नान हेतु प्रयोग कर चरणामृत प्रसाद रूप में ग्रहण होता है।

    खीर (चावल या मखाना)

    फुल-क्रीम दूध मंद आँच पर थोड़ा गाढ़ा होने तक पकाएँ। भिगोया चावल (या व्रत हेतु मखाना या सामा चावल) डालकर नरम व मलाईदार होने तक पकाएँ। शक्कर से मीठा करें, इलायची, केसर डालें, बादाम, काजू, पिस्ता से सजाएँ। गुनगुना या ठंडा अर्पित करें।

    छप्पन भोग — कृष्ण को अर्पित 56 पदार्थ

    छप्पन भोग का अर्थ है 'छप्पन अर्पण' — 56 पदार्थों का भव्य भोग जो जन्माष्टमी, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट जैसे महान अवसरों पर भगवान कृष्ण को अर्पित होता है। यह परम्परा कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने से जुड़ी है: सात दिन-रात उन्होंने इंद्र की वर्षा से व्रजवासियों की रक्षा हेतु पर्वत धारण किया, बिना भोजन किए। चूँकि कृष्ण सामान्यतः दिन में आठ बार भोजन करते थे, व्रजवासियों ने पश्चात प्रेमपूर्वक उन्हें 8 × 7 = 56 पदार्थ अर्पित किए, छूटे भोजनों की पूर्ति हेतु। यही छप्पन भोग का उद्गम है।

    पारम्परिक छप्पन भोग हर स्वाद और बनावट को सन्तुलित करता है — मिष्ठान्न, नमकीन, अन्न, रोटी, दुग्ध, पेय और फल — जिससे प्रेम के अर्पण में कोई कमी न रहे। नीचे 56 पदार्थों का प्रतिनिधि विन्यास श्रेणीवार दिया गया है। सभी सात्त्विक रूप से बनाकर भक्ति से अर्पित होते हैं, फिर महाप्रसाद रूप में बाँटे जाते हैं।

    मिष्ठान्न

    • खीर
    • रबड़ी
    • पेड़ा
    • लड्डू (बेसन)
    • मोतीचूर लड्डू
    • जलेबी
    • मालपुआ
    • घेवर
    • बर्फी
    • काजू कतली
    • हलवा (सूजी)
    • गुलाब जामुन
    • रसगुल्ला
    • संदेश
    • बालूशाही
    • इमरती

    दुग्ध व माखन

    • माखन
    • मिश्री
    • मलाई
    • दही
    • पनीर
    • घी
    • श्रीखंड
    • बासुंदी

    नमकीन

    • कचौड़ी
    • समोसा
    • मठरी
    • नमक पारे
    • सेव
    • पकौड़ा
    • दही वड़ा
    • पापड़

    अन्न, चावल व रोटी

    • पूरी
    • पराठा
    • रोटी
    • मीठा पुलाव
    • खिचड़ी
    • सादा चावल
    • कढ़ी
    • चना (सुंडल)

    पेय

    • पंचामृत
    • ठंडाई
    • लस्सी
    • छाछ
    • शरबत
    • नारियल पानी

    फल व मेवे

    • मौसमी फल
    • केला
    • अंगूर
    • अनार
    • मेवा मिश्रण
    • मुरब्बा

    चटनी व अन्य

    • धनिया चटनी
    • इमली चटनी
    • अचार
    • शहद

    कुल 56 पदार्थ

    संबंधित पृष्ठ

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    छप्पन भोग क्या है?

    छप्पन भोग का अर्थ है 'छप्पन अर्पण' — 56 पदार्थों का भव्य भोग जो जन्माष्टमी और गोवर्धन पूजा जैसे विशेष अवसरों पर भगवान कृष्ण को अर्पित होता है। यह मिष्ठान्न, नमकीन, अन्न, दुग्ध, पेय और फलों को समेटता है, भगवान के प्रति पूर्ण प्रेम व्यक्त करते हुए।

    कृष्ण को 56 पदार्थ क्यों अर्पित होते हैं?

    जब कृष्ण ने व्रजवासियों की रक्षा हेतु सात दिन-रात गोवर्धन पर्वत उठाया, तब उन्होंने भोजन नहीं किया। चूँकि वे सामान्यतः दिन में आठ बार भोजन करते थे, व्रजवासियों ने पश्चात प्रेमपूर्वक 8 × 7 = 56 पदार्थ अर्पित किए। यही छप्पन भोग का उद्गम है।

    जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि कृष्ण को क्या अर्पित करें?

    माखन-मिश्री अर्पित करें, जो कृष्ण का प्रिय है, साथ ही पंजीरी, पंचामृत, खीर, फल और मिष्ठान्न। सम्भव हो तो 56 पदार्थों का छप्पन भोग बनाएँ। सब आहार बिना प्याज-लहसुन के सात्त्विक रूप से बनाकर प्रेम से अर्पित होता है।

    मुख्य जन्माष्टमी रेसिपी कौन सी हैं?

    मुख्य जन्माष्टमी प्रसाद रेसिपी हैं माखन मिश्री (माखन व मिश्री), पंजीरी (भुना आटा व मेवे), पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद व शक्कर) और खीर (चावल या मखाना की)। सभी मध्यरात्रि पूजा में बाल कृष्ण को अर्पित होती हैं।

    Lord Jagannath Baladeva Subhadra deities temple darshan
    Srila Prabhupada founder ISKCON spiritual master portrait